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Thursday, 7 February 2013
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  • भारतः बाल यौन उत्पीड़न पर खामोशी और उपेक्षा का साया

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    Duration : 4m 16s
    (नई दिल्ली) ह्यूमन राइट्स वॉच ने आज जारी नई रिपोर्ट में कहा कि भारत सरकार को नई दिल्ली में दिसंबर, 2012 में एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के बाद व्यापक सुधार प्रयासों के तहत यौन उत्पीड़न से बच्चों की सुरक्षा में सुधार लाना चाहिए।
    यह परेशान करने वाली बात है कि भारत में बाल यौन उत्पीड़न घरों, स्कूलों तथा आवासीय देखभाल केंद्रों में आम बात है। दिल्ली बलात्कार कांड के बाद सरकार द्वारा कानूनी और नीतिगत सुधार सुझाने के लिए गठित की गई समिति ने पाया कि बाल सुरक्षा नीतियाँ “स्पष्ट रूप से उन लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रही हैं जिनका उन्होंने बीड़ा उठाया था।”
    82-पृष्ठों की रिपोर्ट, “इस खामोशी को तोड़ना होगाः भारत में बाल यौन उत्पीड़न,” में इस बात की जाँच की गई है कि कैसे सरकार द्वारा इस समय उठाए जा रहे कदम बच्चों को यौन उत्पीड़न से बचाने तथा पीड़ितों के साथ व्यवहार के मामलों में अपर्याप्त हैं।अनेक बच्चों को दोबारा दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ रहा है और उसका कारण है पीड़ादायक चिकित्सीय जाँच और पुलिस और अन्य अधिकारी जो या तो उनकी बात सुनना नहीं चाहते या फिर उन पर विश्वास नहीं करते।ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि यदि सुरक्षा की प्रक्रिया का सही तरह से कार्यान्वयन नहीं हुआ अथवा यह सुनिश्चित करने के लिए न्याय व्यवस्था में सुधार नहीं लाया गया कि बाल यौन उत्पीड़न की पूरी रिपोर्ट हो और उचित रूप से मुकदमा चलाया जाए तो इस समस्या से निबटने के सरकारी प्रयास विफल साबित होंगे।